लहरो का छूकर
फिर लौट जाना
छु कर चेहरे को
हवा का बहलाना
पैरो को गुदगूदाती
रेशमसी रेत
आसमान मे लहराते
बादल की खेत
उछलती लहरो का
वो दिवानापण
किनारे से आशिकी
हो गयी है आज
समंदर से भी दोस्ती
हो जाएंगी अब
©️ShashikantDudhgaonkar
लहरो का छूकर
फिर लौट जाना
छु कर चेहरे को
हवा का बहलाना
पैरो को गुदगूदाती
रेशमसी रेत
आसमान मे लहराते
बादल की खेत
उछलती लहरो का
वो दिवानापण
किनारे से आशिकी
हो गयी है आज
समंदर से भी दोस्ती
हो जाएंगी अब
©️ShashikantDudhgaonkar