बिखरा बिखरा

कभी खुद से पुछा मैने बहता था दरिया दिल मे तेरे क्यो थम सा गया है क्यो रूक सा गया है चट्टाण है या पहाड कोई डूबा रहा जो बोझ तले जो तूम चूप चूप बैठे हो या आदत सी हो गयी है अब घनी धुंध के अंधेरो मे भटक गये तूम मंझील से बची … Read more