दर्द
पढने का शौक है तोआंखे पढना सीखो तूमदर्द भरी कहानीयां वहींछूपाते है लोग©️ShashikantDudhgaonkar
पढने का शौक है तोआंखे पढना सीखो तूमदर्द भरी कहानीयां वहींछूपाते है लोग©️ShashikantDudhgaonkar
डर बहोत हैमौत से इसलिएजीने की आरजूरखते है हमजीने के तरीकेतो लाखो हैपर नुक्से गलतआजमाते है हम©️shashidudhgaonkar
परदा हटा वो बुंदो काबारीश जो थंम गयीगीली मिट्टी की खुशबूयादो मे ले गयीवो नजर झुकी-झुकीचेहरे पर हंसीजैसे आसमान मे बादलटहल रहा था कोईछाता लिए हातो मेचलना उसका संभलकरमहक रही थी सादगीउस हसीन चेहरे परलाख कोशिशे लेकीननजरे मीली नहीख्वाब अधूरा देकरबारीश चली गयीआज फिर वही बारीशऔर महक रही है मिट्टीकाश वो चेहराफिर नजर आ जाए.©️ShashikantDudhgaonkar
बारा महीने केसाल मेछे गुजर गयेछे गुजरेंगे कलबीस-बीस मे यूंफस गये जो हमबदल गये है हमारेसब जीने के ढंग©️shashidudhgaonkar
पल भर के लिएभुल गये सारे गमसाकी ने जबभर दिए जामकुछ वो पिलाते गयेकुछ हम पिते गयेजशन अपने दर्द कामनाते रहे हम.©️shashidudhgaonkar
ये हया है या नफरतहम गुमान करते रहेतिर चलाकर पल मेवो अनजान हो गये©️shashidudhgaonkar(गुमान : Guess)
आराम की जिंदगीकाम बहोत कमदर्द का बवालफिर क्यो करे.कुछ खामीया जरूर है जिंदगी मे आजकलआदते जो बिघाडरखी है हमने.©️shashidudhgaonkar
वक्त थम गया हैचलते चलतेक्यों ना अपने आप कोजान ले हमजिंदगी के बहाव मेबहते बहतेकिनारो से पहचानखो गये है हम©️shashidudhgaonkar
बादल बनकर आसमान मेएक दिन मिल जाना हैएक रूकी हुई….सांस के सहारेएहसास के परे….चले जाना हैजिदंगी बीती कितनीऔर कितनी…..बीताई मैनेजिंदगी उलझी कितनीऔर कितनी…उलझाई मैनेना समझ सका हूंना समझना…..चाहता हु मैमौत से बस एकदरख्वास्त है मेरीतेरे आने की तारीख कामुझे पता ना हो@ShashikantDudhgaonkar.