गीली मिट्टी की खुशबू

परदा हटा वो बुंदो काबारीश जो थंम गयीगीली मिट्टी की खुशबूयादो मे ले गयीवो नजर झुकी-झुकीचेहरे पर हंसीजैसे आसमान मे बादलटहल रहा था कोईछाता लिए हातो मेचलना उसका संभलकरमहक रही थी सादगीउस हसीन चेहरे परलाख कोशिशे लेकीननजरे मीली नहीख्वाब अधूरा देकरबारीश चली गयीआज फिर वही बारीशऔर महक रही है मिट्टीकाश वो चेहराफिर नजर आ जाए.©️ShashikantDudhgaonkar

दर्द

पल भर के लिएभुल गये सारे गमसाकी ने जबभर दिए जामकुछ वो पिलाते गयेकुछ हम पिते गयेजशन अपने दर्द कामनाते रहे हम.©️shashidudhgaonkar

आदते

आराम की जिंदगीकाम बहोत कमदर्द का बवालफिर क्यो करे.कुछ खामीया जरूर है जिंदगी मे आजकलआदते जो बिघाडरखी है हमने.©️shashidudhgaonkar

पहचान

वक्त थम गया हैचलते चलतेक्यों ना अपने आप कोजान ले हमजिंदगी के बहाव मेबहते बहतेकिनारो से पहचानखो गये है हम©️shashidudhgaonkar

एक दिन तो जाना है

बादल बनकर आसमान मेएक दिन मिल जाना हैएक रूकी हुई….सांस के सहारेएहसास के परे….चले जाना हैजिदंगी बीती कितनीऔर कितनी…..बीताई मैनेजिंदगी उलझी कितनीऔर कितनी…उलझाई मैनेना समझ सका हूंना समझना…..चाहता हु मैमौत से बस एकदरख्वास्त है मेरीतेरे आने की तारीख कामुझे पता ना हो@ShashikantDudhgaonkar.