बिखरा बिखरा
कभी खुद से पुछा मैने बहता था दरिया दिल मे तेरे क्यो थम सा गया है क्यो रूक सा गया है चट्टाण है या पहाड कोई डूबा रहा जो बोझ तले जो तूम चूप चूप बैठे हो या आदत सी हो गयी है अब घनी धुंध के अंधेरो मे भटक गये तूम मंझील से बची … Read more
कभी खुद से पुछा मैने बहता था दरिया दिल मे तेरे क्यो थम सा गया है क्यो रूक सा गया है चट्टाण है या पहाड कोई डूबा रहा जो बोझ तले जो तूम चूप चूप बैठे हो या आदत सी हो गयी है अब घनी धुंध के अंधेरो मे भटक गये तूम मंझील से बची … Read more
हम रोज मीला करते हैहररोज मिला करते हैतूम दिखती हो चौराहे परकभी पेड की टहनी परकभी झांकते बादलो मेतो कभी रात के अंधेरो मेतारो मे तूम चमकती होखेतो मे लहराती होकभी अपनो की हसीं मेकभी गैर के खुशी मेतूम सदा महकतीरहती होकभी गली मुहल्लो मेकभी अनजान राहो परऐ जिंदगी तूम हमकोहररोज मीला करती हो©️ShashikantDudhgaonkar
खुलकर करोबाते यहांएक दिन चुपचापजाना हैबोझ बना करजज्बातो काक्यों खिच रहे होजिंदगीबाते करोहवा के साथहवा मे उडतीचिढीयों के साथकभी अपनेअपनो के साथया अनजानअजनबी के साथया करो तुम बातेअपने आप सेगुफ्तगू अपनेसाये सेबोझ कुछ अपनाकर लो कमजी लोंगे तूमफिर जिंदगी©️ShashikantDudhgaonkar
मिलती है रोजयहां चोटे हजारगुलशन मे है बहारकाटो की यहांकिस किस की करूफरियाद मै यहाकातील जब यहांलांखो मे है.©️ShashikantDudhgaonkar
आईने मे चेहरादेखता हुं रोजचेहरा बदलतांदेखता हुं रोजबात चेहरे तक होतीतो परवा नही होतीखुद को भी बदलतेदेंखता हुं रोज©️ShashikantDudhgaonkar
है वक्त तो कर लोबात अपने दिल सेजज्बात अनसूने बहोतरखे है संभालके©️ShashikantDudhgaonkar
क्या सच क्या झुठपरखना क्योंआसान जो यहांऐतबार करना.मुश्कील है बहनातथ्यो का यहाबाढ जब मीथ्यो कीबेकाबू यहां©️ShashikantDudhgaonkar
बैठो जरा ठहर जाओंदो पल के लिए यहांजिंदगी के दौंड मेथक गये हो तूमरूक जाएंगी जिंदगीजहां थम जाएंगे कदमआगे दौडके उसकेजीता कोण यहा.©️ShashikantDudhgaonkar
लहरो का छूकरफिर लौट जानाछु कर चेहरे कोहवा का बहलानापैरो को गुदगूदातीरेशमसी रेतआसमान मे लहरातेबादल की खेतउछलती लहरो कावो दिवानापणकिनारे से आशिकीहो गयी है आजसमंदर से भी दोस्तीहो जाएंगी अब©️ShashikantDudhgaonkar