चीखना चिल्लाना
क्यो चीखना चिल्लाना अहम हो गया है समझा-बुझाने का अंदाज बदल गया है क्या उंचा ही सुनते है लोग आजकल या बढ गये है फासले दुरीया इतनी के आवाज ही नही पहुंचती उन तक ©️ShashikantDudhgaonkar
क्यो चीखना चिल्लाना अहम हो गया है समझा-बुझाने का अंदाज बदल गया है क्या उंचा ही सुनते है लोग आजकल या बढ गये है फासले दुरीया इतनी के आवाज ही नही पहुंचती उन तक ©️ShashikantDudhgaonkar
सोच समझकर जीता हूं मै के सही करू ना गलत कभी फिर भी उलझन मे पड जाता हूं जब सही गलत के बीच के फासले समझ नही पाता हूं उलझन गहरी और हो जाती है जब सही गलत के मानको मे भी गडबड मुझे दिख जाती है ©️ShashikantDudhgaonkar
एक हसीन शाम की राह देखता हुं मै और दिन है के कभी ढलता ही नही ©️ShashikantDudhgaonkar
ये जरूरी नही है के जो लिखता हु मेरी ही कहानी हो या मेरा ही दर्द हो कुछ किस्से मैने चुराये है औरो से कुछ आंसू अनजान महसूस किए है ©️shashidudhgaonkar
झुलस रही है आग चारो ओर ना मैने जलायी . ना तूमने लगाई ©️ShashikantDudhgaonkar
ऊम्र भर वो चले गमे तनहाई के साथ ना साथी ना हमसफर न कोई परछाई मरने के बाद लगे हमदर्दो के मेले कितने है सच्चे कितने तमाशाई ©️ShashikantDudhgaonkar