चीखना चिल्लाना

क्यो चीखना चिल्लाना अहम हो गया है समझा-बुझाने का अंदाज बदल गया है क्या उंचा ही सुनते है लोग आजकल या बढ गये है फासले दुरीया इतनी के आवाज ही नही पहुंचती उन तक ©️ShashikantDudhgaonkar

उलझन

सोच समझकर जीता हूं मै के सही करू ना गलत कभी फिर भी उलझन मे पड जाता हूं जब सही गलत के बीच के फासले समझ नही पाता हूं उलझन गहरी और हो जाती है जब सही गलत के मानको मे भी गडबड मुझे दिख जाती है ©️ShashikantDudhgaonkar

हवा

कुछ हवा से ही करता हुं बाते कुछ हवा की सुनता हुं कहानी गुजरती है वह गलीयों से कई कोई खुशी के कोई हसीं के वादीयों से भी गुजरती है वह चैन की चादर लपेटे हुए कभी चुराकर थोडी खामोशी विरानो से वह ले आती है चुप रहती है फिर कुछ ना कहती छुकर हौले … Read more

अफसोस

सोच बंद हो जाए सवाल खतम हो जाए जो ढूंढ रहा हूं जवाब मिल जाएं आँखे बंद करू तो नींद आ जाए खुशी तो नहीं कुछ पल के लिए चैन मिल जाए बस और क्या चाहूं चाह भी क्या सकता हूं चाहने को अब बचा ही क्या थोडी खरोचे बहोत सारे घाव बहती हुई धार … Read more

असह्य

कुछ बाते बार बार आती है याद बाते कडवी कडवी कहानीयां हरपल हर सांस घुमती रहती है इर्दगिर्द आसपास सो भी जाती है मेरे ही साथ मेरे साथ ही जाग जाती है निंद खुलतेही जोश मे आकर चुभने लगती है बार बार ना भाग सकता हु ना छुप सकता हू अपने आप को न छोड … Read more

छांव

कभी अपने आपसे मिलकर देखो बडी फुरसत से पास बिठाकर थोडा अपने आप को सुनकर तो देखो मील जाएंगे गीत खोये हुए अल्फाज मासुम सवाल अधुरी ख्वाईशे वह रास्ते धुंधले आएंगे याद लडखडाते कदम जहां पर चले थे मिल जाएगा बचपन थोडा आवारापन और कुछ ऐसे ही यादें जो आती है याद पता नही क्यों … Read more

मेले

ऊम्र भर वो चले गमे तनहाई के साथ ना साथी ना हमसफर न कोई परछाई मरने के बाद लगे हमदर्दो के मेले कितने है सच्चे कितने तमाशाई ©️ShashikantDudhgaonkar