छत, दीवारें और रिश्ते
कौन इस घर की देखभाल करे
रोज एक चीज टूट जाती है
चालाक है सभी साकिन यहां
फिर भी क्यों टूट जाती है
रोज एक चीज टूट जाती है
चालाक है सभी साकिन यहां
फिर भी क्यों टूट जाती है
जोड़कर हर एक कोना
चार दीवारें जो बनाईं हैं
खामी रह गयी शायद छत में
जो चीजें टूट जाती हैं
चार दीवारें जो बनाईं हैं
खामी रह गयी शायद छत में
जो चीजें टूट जाती हैं
अपनी अपनी जगह पर यहां
महफूज हर चीज है
थरथराहट है हाथों में शायद
जो चीजें टूट जाती हैं
महफूज हर चीज है
थरथराहट है हाथों में शायद
जो चीजें टूट जाती हैं
जोड़ देना उठाकर टुकड़े
कोशिश मेरी जारी है
गलती शायद गोंद की है जो
चीजें टूट जाती हैं
कोशिश मेरी जारी है
गलती शायद गोंद की है जो
चीजें टूट जाती हैं
टुकड़ों से फर्श भरी पड़ी है
दरारें चौड़ी दीवारों में
रिश्तों में कोई खोट है शायद
जो चीजें टूट जाती हैं
दरारें चौड़ी दीवारों में
रिश्तों में कोई खोट है शायद
जो चीजें टूट जाती हैं
©️ Shashikant Dudhgaonkar
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Yes, when relationships are not close and strong we may feel that everything is breaking. Well written.
Thanks a lot for going through my lines.