छत, दीवारें और रिश्तें
छत, दीवारें और रिश्ते | हिंदी कविता | Shashikant Dudhgaonkar Home › Poetry › हिंदी कविता छत, दीवारें और रिश्ते कौन इस घर की देखभाल करे रोज एक चीज टूट जाती है चालाक है सभी साकिन यहां फिर भी क्यों टूट जाती है जोड़कर हर एक कोना चार दीवारें जो बनाईं हैं खामी रह गयी … Read more