दुविधा

दुविधा ना जाने कब सराहतसे से होंगा सामना ये उंट क्यो रूक जाते है, पहाड के नीचे आते आते हादसो का सिलसिला है के, कभी थमता ही नही सारी उम्र गुजर जाती है, एक अरमान पुरा होते होते आसान है यह कहना, निहायत जज्बाती हूं मै नही बिकती है सख्ती, यहां सदमो की बाजार मे … Read more