दुविधा

Picture Credit : Toa Heftiba @UnSplash

दुविधा

ना जाने कब सराहतसे से होंगा सामना

ये उंट क्यो रूक जाते है, पहाड के नीचे आते आते

हादसो का सिलसिला है के, कभी थमता ही नही

सारी उम्र गुजर जाती है, एक अरमान पुरा होते होते

आसान है यह कहना, निहायत जज्बाती हूं मै

नही बिकती है सख्ती, यहां सदमो की बाजार मे

बेसब्र ना बनो इतना, बरसो से कह रहे हो

इबादत सब्र की मै, कर रहा जीते जीते

ये मसला नही संजीदा, क्यों समझा रहे हो

पी रहा हू जब आंसू, मै हर रात सोते सोते

मिलता नही सुकून, मुझे दर्द सवांरने मे

शब ए गम गुजारी मैने, चश्म ए जाम बा जाम पीते पीते

©️ShashikantDudhgaonkar

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