
अपने हिसाब से
मैखाने है बहोत
दोस्त भी है साकी सभी
जाहीर परस्त तो नही
नशेमन भी नही हूं यारो
पर क्यां करे जब दावते
आने से कभी रूकती नही
अकेले भी रह लेता हूं
होती है जब यारी
अपने कमरेसे कभी कभी
तनहाई पसंद तो नही
गमगीन भी नही यारो
पर क्यां करे जब दिवारे
आजाद मुझे करती नही
बकायदा जी रहा हू
औसतन जिंदगी मेरी
पर कोई यारबाश
तो कोई बेएहसास
शखसियत बता रहे मेरी
क्यां करे जब जी रहा हूं
जिंदगी मै मेरी
अपने हिसाब से
©️ShashikantDudhgaonkar
