दो छोर

दो छोर

सवाल हजार उठकर दिलमे

सामने जो आ जाते है

जवाब लाखो मुस्तैदीसे

भागे चले आ जाते है

यकीन अगर न होता उन पर

वो कहते सवाल खरा नही

फिर हम कुछ दिखाते है

वो कुछ और दिखाते है

हम इस छोर पर खडे है

वो उस छोर की बाते करते है

हम कहना कुछ चाहते है

वो कुछ और सुनना चाहते है

हम इस दौर की बाते करते है

वो उस दौर की बाते करते है

हम दोनो बाते करते है

बस बातेही करते रहते है

फासले इतने बढ गये है

हम दोनो के बीच आजकल

ना हम कुछ सुनते है

ना वो सुनना चाहते है

©️ShashikantDudhgaonkar

1 thought on “दो छोर”

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