मेले

ऊम्र भर वो चले गमे तनहाई के साथ ना साथी ना हमसफर न कोई परछाई मरने के बाद लगे हमदर्दो के मेले कितने है सच्चे कितने तमाशाई ©️ShashikantDudhgaonkar

बिखरा बिखरा

कभी खुद से पुछा मैने बहता था दरिया दिल मे तेरे क्यो थम सा गया है क्यो रूक सा गया है चट्टाण है या पहाड कोई डूबा रहा जो बोझ तले जो तूम चूप चूप बैठे हो या आदत सी हो गयी है अब घनी धुंध के अंधेरो मे भटक गये तूम मंझील से बची … Read more

जिंदगी

हम रोज मीला करते हैहररोज मिला करते हैतूम दिखती हो चौराहे परकभी पेड की टहनी परकभी झांकते बादलो मेतो कभी रात के अंधेरो मेतारो मे तूम चमकती होखेतो मे लहराती होकभी अपनो की हसीं मेकभी गैर के खुशी मेतूम सदा महकतीरहती होकभी गली मुहल्लो मेकभी अनजान राहो परऐ जिंदगी तूम हमकोहररोज मीला करती हो©️ShashikantDudhgaonkar

कर लो बाते

खुलकर करोबाते यहांएक दिन चुपचापजाना हैबोझ बना करजज्बातो काक्यों खिच रहे होजिंदगीबाते करोहवा के साथहवा मे उडतीचिढीयों के साथकभी अपनेअपनो के साथया अनजानअजनबी के साथया करो तुम बातेअपने आप सेगुफ्तगू अपनेसाये सेबोझ कुछ अपनाकर लो कमजी लोंगे तूमफिर जिंदगी©️ShashikantDudhgaonkar