बैचेन शाम

बैचेन शाम ना उजाला ना अंधेरा अजीबसा माहोल है दबे पावसे आयी है शाम लंबे साये लेकर साथ बैचेनी है रंज है थकान भी है दिन भर की चाय की प्याली सामने है थंडा करके पिता हूं रात की उम्र बढने तक अखबार बांसी पढतां हू ©️ShashikantDudhgaonkar

यारीयां

यारीयां पहले सावन के दिनो मे बारीश आती थी घने बादल अपने साथ लाती थी आसमान मे गरजकर करती थी बौछारे गीली होती थी जमीन और यारीयां सारी सूख भी जाती थी जल्द ही आनेवाली धुप मे आजकल तो बेमौसम सावन जारी रहता है बारीश हो ना हो तुफान बना रहता है गरजते है बादल … Read more