बंद आंखे

बंद आंखे बदल गये है हालात यहां कुछ ऐसे आजकल के भरी दोपहर मे आती है रात अचानक उभरकर हम कहते नही है झुठ देखों आप झांककर बंद आंखोपर लगी हुई पट्टीयां फाडकर उडते नही अब पंछी यहा फिजा खाली खाली है सुकून ढूंढ रहे है, वोह अब सय्यादोके जाल पर हम कहते नही है … Read more