कतार

कतार सांसे फुल रही थी उम्रभर जो गुजारी जिंदगी दौडमे कभी राशन कभी पानी कभी जिंदा रहने के लिए क्या सोचा था अंत भी दफतन हो जाएंगा कतारो मे लगे रहते रहते कतार मे खो जाएंगा सांसो की कतार भी अब खत्म हो रही तेजीसे आखिरी कतार अब बाकी है उसके घरवालो के लिए ©️ShashikantDudhgaonkar

यादो के मेले

यादो के मेले खयाल आता है मन मे युहीं बार बार कुछ भुला तो नही मै या कुछ खो दिया या यादो की ढेर पर हसीन पलो को छोड दिया सोचा था उनको रखेंगे संभालके सजाएंगे उनको संजोके के रखेंगे न हुआ यह न कर सके हम अब तो बेतरतीब आती है यादे रूक रूक … Read more

सहारे

सहारे फैली हुई आग को बुझा दे शायद बेमौसम बारीश जो बरस रही है खुलके निशानी है शायद या शगुन कोई कोशीशो के सरहद्द पर बहलाता हू खुद को बेकशी के हालात मे तिनको मे भी ढुंढता हूं सहारे ©️ShashikantDudhgaonkar

विफलता

विफलता बहोत सहा है चंद दिनो मे जाना कुछ कुछ समझा है भिड इतनी अस्पतालो मे जगह न कोई खाली थी कोशीशे मेरी विफल रही वो बाहों मे दम तोड गये गया फिर उनको लेकर मै अकेले समशान घाट पर भिड देखकर वहा खडी आसूं मेरे सुख गये क्रिया करम करके जब पहुंचा घर बडी … Read more

दिवानगी

दिवानगी बदल गया है सबकुछ यहा या एहसास बदलेसे है मेरे देख रहा हू जहां कही बरस रहे आसमान से शोले प्यास भी लगती बहोत यहा पर पाणी हलक मे चूभ रहा है सांसे फुल रही है मेरी वो कहते झुठ हाफ रहे हो सन्नाटा फैला चारों ओर जश्न कोई मना रहे है जलती होली … Read more

बैचेन शाम

बैचेन शाम ना उजाला ना अंधेरा अजीबसा माहोल है दबे पावसे आयी है शाम लंबे साये लेकर साथ बैचेनी है रंज है थकान भी है दिन भर की चाय की प्याली सामने है थंडा करके पिता हूं रात की उम्र बढने तक अखबार बांसी पढतां हू ©️ShashikantDudhgaonkar

यारीयां

यारीयां पहले सावन के दिनो मे बारीश आती थी घने बादल अपने साथ लाती थी आसमान मे गरजकर करती थी बौछारे गीली होती थी जमीन और यारीयां सारी सूख भी जाती थी जल्द ही आनेवाली धुप मे आजकल तो बेमौसम सावन जारी रहता है बारीश हो ना हो तुफान बना रहता है गरजते है बादल … Read more

शादाब पल

शादाब पल एक दिन पुछा हमने क्यो ईतनी मायूस हो तूम जिंदगी पुछां उसने मुझसे ही मुझे फुरसतसे देखा भी है कभी बस खोये रहते हो जज्बातो मे कई कभी यादे रंजीदा कभी फिक्र लहसील कभी किया है महसुस वह शादाब पल पलता है आज और कल के बीच ©️ShashikantDudhgaonkar रंजीदा – sad लहसील – … Read more

लमहे

लमहे साल बदलते देखे हमने गुजरे बहोत है बाकी कम है अब गिनती उनकी कर लेता हूं रूक जाता हूं सवालो से बाकी कम है कितना कम है साल गिनू या माह मै या गिनू मै उनको लमहो मे हांथो की उंगलियो पर ©️ShashikantDudhgaonkar